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Thursday, 11 August 2016

नमस्कार मित्रों

अपने मेरी पिछली पोस्ट्स में मेरी मसूरी यात्रा के विषय में पढ़ा था । अब में अपनी एक अन्य रोचक यात्रा जो की नैनीताल की है के बारे में अपने अनुभव आपसे साझा करूँगा ।

कावड़ यात्रा 

शुरुआत


पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सावन के माह में एक विशेष त्यौहार होता है सावन शिवरात्रि , जिसे हम महा शिवरात्रि भी कहते हैं । इसमें श्रद्धालु हरिद्वार से गंगा जल ले कर चलते है । और मेरठ के पास पुरा महादेव के मंदिर में शिवरात्रि के दिन चढ़ाते है । इसके अलावा कुछ श्रद्धालु अपने अपने शहरो में भी गंगा जल ले कर जाते हैं और वहाँ के मंदिरो में शिव जी का अभिषेक करते है । इन्हें कावड़िये कहते है । इन कावड़िये की संख्या हर साल 3 करोड़ के लगभग होती है । इन कावडियों को मुज़फ्फरनगर से पास होने में लगभग 10 दिन का समय लगता है । इस दौरान हरिद्वार से मेरठ तक पूरा मार्ग हेवी ट्रेफिक व गाड़ियों के लिए बंद रहता है । अगर किसी सज्जन को मुज़फ्फरनगर से दिल्ली जाना है तो उसे वाया बिजनोर जाना पड़ेगा । हमारा प्लांट जिसमे मै काम करता हूँ वो भी एक हफ्ते के लिये मेंटीनेंस के लिए बंद रहता है । तो ये समय हमारे लिए घूमने जाने का आदर्श समय होता है । इसी प्रकार कावड़ के दौरान हमारा प्रोग्राम नैनीताल जाने का बन गया । यह यात्रा लगभग 5 साल पहले की गई थी । बैठे बैठे बोर हो रहे थे । प्लांट में भी कोई काम नहीं था । अचानक मन में ख्याल आया कहीं घूमने चलते है । पर समस्या थी की रास्ते बंद थे । बैठ कर गूगल मैप पर दिमाग लगाया तो देखा नैनीताल का रास्ता वाया बिजनोर है । और ये रास्ता खुला रहता है । यहाँ का तो ध्यान ही नहीं आया था । लेकिन जल्दी आये दुरुस्त आये । अभी हमारे पास 4 दिन थे । और 4 दिन में आराम से नैनीताल घूम कर आया जा सकता था । सबसे पहले नेट पर रास्ता चेक किया गया । तो पता चला नैनीताल जाने के दो रास्ते है । एक हल्द्वानी हो कर , दूसरा कालाडूंगी हो कर । हल्द्वानी का रास्ता मुख्य रास्ता है । हमें शक था कि कालाडूंगी वाला रास्ता ख़राब न हो । लेकिन एक दो लोगो से बात करके पता चल गया कि वो रास्ता भी अच्छा है । और ट्रेफिक भी कम है मैंने अपने साले को कहा उसकी शादी को एक साल भी नहीं हुआ था इसलिए उसे ऐसे मौकों की तलाश रहती थी । वो तुरंत तैयार हो गए । अब हम , मै मेरी घर्मपत्नी , माताजी , बड़ा बेटा , छोटा बेटा , साले साहब मनीष व उनकी धर्मपत्नी , कुल साढ़े छः लोग (छोटा बेटा 4 साल का था) एक गाड़ी में बैठ कर चल दिए नैनीताल की ओर ।

कावड़ यात्रा  कुछ दृश्य

कावड़ यात्रा में पैदल चलते कावड़िये

कावड़ यात्रा में  कावड़

कावड़ यात्रा में सुन्दर कावड़